रैबीज से बचाव हेतु अपील

रैबीज से बचाव हेतु अपील

 सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला चिकित्सालय बीजापुर सह नोडल अधिकारी जुनोटिक रोग डाॅ. अभय प्रताप सिंह तोमर ने रेबिज जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव हेतु आम जनता से अपील करते हुए बताया कि यह एक विषाणु से होने वाला संक्रमण है। जो कि अधिकतर कुत्ते के काटने या खरोंच से फैलता है, परंतु यह कैनाईन दांत वाले जानवरों की प्रजाति में आने वाले अन्य जानवर जैसे बिल्ली, बंदर , सियार, भेड़िया , भालू , सूअर इत्यादि के काटने से भी होता है। जागरूकता के अभाव में कुछ लोग जानवरों के काटे जाने पर स्वास्थ्य केन्द्र जाकर उपचार कराने में घबराते हैं, विलंब करते हैं अथवा जड़ी- बूटी द्वारा उपचार कराते हैं, कई लोग अभी भी यह मानते हैं कि कुत्ते के काटने से 14 इंजेक्शन लगेंगे, इस भय से वे अस्पताल ही नहीं जाते जो कि उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। वर्तमान में स्वास्थ्य संस्थाओं में इन्ट्राडर्मल पद्धति से जिसमें से 0 और 3 तथा 7 एंव 28 दिनों में वैक्सीनेशन होता है अथवा इन्ट्रामस्क्युलर पद्धति से जिसमें 0 से 3 और 7 तथा 14 एंव 28 दिनों के निश्चित अंतराल में वैक्सीनेशन किया जाता है। अतः  जनसाधारण से अपील है कि इन जानवरों के काटे जाने पर तत्काल नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र या सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अथवा जिला चिकित्सालय में जाकर चिकित्सक से संपर्क करें। एनिमल बाईट के उपचार हेतु इन सभी केन्द्रों में एन्टी रेबिज काॅर्नर बनाए गए हैं। जहां एनिमल बाईट के प्रकरणों का निः शुल्क उपचार किया जाता है। उपचार उपरांत मरीज को टीकाकरण कार्ड भी दिया जाता है जिसमें अगले टीके की तिथि भी अंकित होती है। अतः आम जनसाधारण से अपील है कि टीका लगवाते समय अपने साथ टीकाकरण कार्ड अवश्य लायें साथ ही रेबिज के सभी टीके निर्धारित समय में अनिवार्यतः लगवाएं।
समाचार क्र. 116

 

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