दिव्यांग बच्चों की कल्पनाओं में दिखा आत्मनिर्भर, समृद्ध और सशक्त भारत

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत शासन की पहलें केवल सुविधाएं पहुंचाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हर बच्चे की प्रतिभा को पहचानकर उसे अभिव्यक्ति का अवसर देने की दिशा में भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी भावना की एक प्रेरक झलक जगदलपुर के शासकीय अस्थि बाधितार्थ बालगृह में देखने को मिली, जहां दिव्यांग बच्चों ने अपनी कल्पनाओं और सपनों को रंगों के माध्यम से कैनवास और रंगोली में उकेरा।

22 सितम्बर को आयोजित विशेष चित्रकला एवं रंगोली प्रतियोगिता का विषय ‘विकसित भारत, मेरे सपनों का भारत’ रहा। बच्चों ने पूरे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ अपनी तूलिका और रंगों को थामा और कागज तथा जमीन पर अपने सपनों के भारत की तस्वीर उकेरी। किसी की कल्पना में आत्मनिर्भर भारत नजर आया तो किसी ने स्वच्छ, समृद्ध, शिक्षित और सशक्त राष्ट्र की तस्वीर रंगों में सजाई।
प्रतियोगिता के दौरान बच्चों की रचनात्मकता, उत्साह और आत्मविश्वास ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उनकी कल्पनाशक्ति और सृजनात्मकता में किसी तरह की कमी नहीं दिखी। नन्हे कलाकारों की कलाकृतियां यह संदेश देती नजर आईं कि अवसर और प्रोत्साहन मिले तो हर प्रतिभा अपनी अलग पहचान बना सकती है।
यह आयोजन बच्चों के लिए अपनी भावनाओं और सपनों को अभिव्यक्त करने का अवसर बनने के साथ-साथ उनके आत्मबल को मजबूत करने का माध्यम भी बना। उत्कृष्ट कलाकृतियों ने उपस्थित लोगों को प्रभावित किया और बच्चों के हुनर की सराहना की गई।