बस्तर न्यूज़:कोण्डागांव चटपटी ईमली से घुल रही है ग्रामीण जनजीवन में मिठास
नगद भुगतान से लॉक डाउन में ग्रामीणों को मिल रही बड़ी राहत
अब तक जिले में ढाई करोड़ से अधिक राशि का वनवासियों को किया गया नगद भुगतान
सर्दियों के खत्म होते ही ग्रामीणों के लिए वनोपज संग्रहण का मौसम चालू हो जाता है। वनोपज संग्रहण ग्रामीणों के आय का आधार है जो उनके खरीफ फसल के विक्रय के बाद वर्ष भर ग्रामीण आजीविका का साधन बनता है। विगत दिनों कोरोना वायरस के विश्वव्यापी प्रसार से बचाव के उपाय के रूप में देशव्यापी लॉकडाउन किया गया जिसके चलते वनोपज संग्रहण कार्यों में बाधा उत्पन्न होने की आशंका जताई जा रही थी। इस बार राज्य सरकार द्वारा इस वित्तीय वर्ष में 22 प्रकार के लघु वनोपजों का संग्रहण किया जाना था। इस लॉक डाउन में भी ग्रामीणों के वनोपज संग्रहण कार्य मे बाधा ना उत्पन्न हो इसलिए राज्य शासन के आदेश उपरांत जिला कलेक्टर नीलकण्ठ टीकाम ने इस हेतु सभी संबंधित अधिकारियों को निर्बाध रूप से वनोपज की खरीदी का कार्य महिला स्वसहायता समूहों के माध्यम से नगद भुगतान द्वारा करने के निर्देश दिये। महिला समूह द्वारा वनोपजों के नगद भुगतान द्वारा संग्रहण से ग्रामीणों को लॉकडाउन में भी ना केवल आत्मनिर्भर बना रहा है अपितु ग्रामीण महिलाओं को रोजगार दिलाने का एक माध्यम भी बना है। ज्ञात हो कि कोण्डागांव की ईमली पूरे देश में सर्वोत्कृष्ट इमली की गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है। इसको देखते हुए इस वित्तीय वर्ष में सभी लघु वनोपज को मिला कर संग्रहण का लक्ष्य 26 करोड़ रुपयों का रखा गया है। पूर्व में ही 13 प्राथमिक लघु वनोपज समितियों द्वारा 65 लाख रुपये की ईमली का नगद आहरण किया जा चुका है। तालाबंदी के उपरांत इस कार्य मे तेजी लाने के लिए सभी प्राथमिक स्व सहायता समूहों समितियों को नगद भुगतान के लिए उनके खातों में कुल एक करोड़ 30 लाख की राशि डाल दी गयी है। जिससे समितियों को नगद भुगतान में किसी भी दिक्कत का सामना ना करना पड़े।
इस पर कलेक्टर श्री टीकाम ने बताया की वनोपज संग्रहण में निरंतरता लाने के लिए सभी आवश्यक इंतेजाम किये जा रहे है सभी समितियों के खातों में राशि उपलब्ध कराए जाने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, मांग होने पर और अधिक राशि उनके खातों में जमा करा दी जाएगी। वर्तमान इमली का सीजन तालाबंदी के दौरान एक सुनहरा अवसर बनकर उभरा है। यह तालाबंदी में भी ग्रामीणों की आजीविका का एक माध्यम बन रहा है साथ ही उन्होंने ग्रामीणों को स्व सहायता समूहों को ही लघु वनोपजों को बेचने को कहा ताकि इसके माध्यम से प्रशासन वनोपजों का सही माप पर, सही मूल्य पर नगद भुगतान द्वारा आपके हितों का संरक्षण कर सके।
मौके पर वन मंडलाधिकारी उत्तम कुमार गुप्ता ने बताया कि इस एक करोड़ तीस हजार राशि में से प्राथमिक लघु वनोपज समिति रांधना को 9 लाख, भतवा 9 लाख, माकड़ी 9 लाख, हीरापुर 11 लाख, अनंतपुर 11 लाख मुलमुला 10 लाख, गिरोला 10 लाख, बड़ेकनेरा 11 लाख, कोण्डागांव 11 लाख, मुनगापदर 11लाख, बयानार 9 लाख, बांसगांव 10 लाख, मर्दापाल 10 लाख रुपये राशि जारी कर दी गयी है साथ ही बताया कि कोण्डागांव वन मंडल को इस वित्तीय वर्ष में 20 हजार क्विंटल इमली का संग्रहण जाना है एवं निकट भविष्य में वनोपजों की खरीद पर बोनस प्रदान करने पर भी राज्य सरकार चर्चा कर रही है।
उल्लेखनीय है कि दक्षिण वनमंडल कोण्डागांव अंतर्गत 22 प्रकार के वनोपजो का कुल 56500 क्ंिवटल संग्रहण किये जाने का लक्ष्य रखा गया है। जिसमें वर्तमान स्थिति तक ईमली 6403.57 क्विं, चरोटा बीज 141.62 क्विं, हर्रा 281.38 क्विं, बहेड़ा 233.38 क्विं, महुआ फूल 23.53 क्विं का संग्रहण किया जा चुका है और इसके भुगतान के रुप में कुल 2 करोड़ 9 लाख से अधिक की राशि ग्रामीणों को नगद भुगतान की गई है। इसी प्रकार उत्तर वनमंडल केशकाल अंतर्गत ईमली 1456.02 क्विं, चरोटा बीज 71.40 क्विं, बहेड़ा 83.64 क्विं, हर्रा 402.79 क्विं सहित अन्य वनोपज का संग्रहण किया जा चुका है जिसका अब तक भुगतान 55 लाख 67 हजार से अधिक की राशि वनवासियों को नगद भुगतान किया जा चुका है।