मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस में दिखाई सख्ती — कहा, “जनहित के कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी

9 घंटे चली मैराथन बैठक

राज्य एवं केन्द्र शासन की फ्लैगशिप योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे

बस्तर संभाग के मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष अभियान चलाया जाए

प्रभारी सचिवों और संभागीय आयुक्तों को योजना के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा करने के निर्देश

कलेक्टर कॉन्फ्रेंस में सुशासन, पारदर्शिता और जनहित योजनाओं पर मंथन

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में रविवार को मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस 2025 में सुशासन, पारदर्शिता और जनहित के नए मानक तय किए गए। बैठक की शुरुआत निर्धारित समय से पहले हुई, जिसने पूरे प्रशासन को मुख्यमंत्री की वर्क-डिसिप्लिन और परिणाम केंद्रित कार्यशैली का सीधा संदेश दिया।  बैठक में मुख्य सचिव श्री विकास शील, सभी विभागीय सचिव, संभागायुक्त और कलेक्टर उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने प्रारंभ से ही स्पष्ट कर दिया कि शासन की नीतियों और योजनाओं का अंतिम लाभ जनता तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुँचना ही सुशासन का वास्तविक अर्थ है — और इस दिशा में किसी भी स्तर पर ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह कॉन्फ्रेंस केवल समीक्षा बैठक नहीं, बल्कि जनहित के नए मानक तय करने का अवसर है। उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि जिलों में योजनाओं के क्रियान्वयन में परिणाम दिखाई देने चाहिए, केवल रिपोर्टों में नहीं।

मुख्यमंत्री ने कलेक्टर्स कांफ्रेंस में कहा कि शासन की नीतियों और योजनाओं का अंतिम उद्देश्य आम जनता तक योजनाओं का लाभ पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि जनता के बीच आपकी उपस्थिति और संवेदनशीलता ही आपकी पहचान है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि धान खरीदी 15 नवंबर से प्रारंभ होगी और इसकी सभी तैयारियाँ समय पर पूरी कर ली जाएं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि धान खरीदी में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर सीधे कलेक्टर जिम्मेदार होंगे। धान खरीदी में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक धान खरीदी केंद्र की मॉनिटरिंग  हो। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रभारी सचिव जिलों में लगातार निगरानी रखें और संवेदनशील केंद्रों की विशेष मॉनिटरिंग करें। उन्होंने कहा कि धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुगमता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खरीदी की चौकसी बढ़ाने के लिए अब इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का उपयोग किया जाएगा। इससे जिलों में निगरानी तेज होगी और किसी भी गड़बड़ी पर तत्काल कार्रवाई संभव होगी। उन्होंने निर्देश दिया कि अंतरराज्यीय सीमावर्ती जिलों में विशेष सतर्कता बरती जाए, ताकि बाहर से धान की अवैध आवाजाही को रोका जा सके। मुख्यमंत्री ने विशेष पिछड़ी जनजातियों के किसानों के लिए विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन जनजातीय इलाकों में विशेष शिविरों के माध्यम से 100 प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित किया जाए।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक भी पात्र किसान वंचित न रहे, यह प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जिलों में निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी पात्र किसानों को लाभ पहुँचना चाहिए। उन्होंने कमिश्नरों को निर्देश दिया कि बस्तर और सरगुजा सम्भाग में विशेष रूप से योजना की प्रगति की सतत समीक्षा करें।

मुख्यमंत्री  साय ने ऊर्जा विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लाभ अधिकतम लोगों तक पहुँचे। उन्होंने निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में हितग्राहियों को बैंक फाइनेंस की सुविधा आसानी से उपलब्ध कराई जाए, ताकि कोई भी पात्र परिवार योजना से वंचित न रहे।

स्वास्थ्य सेवाओं पर मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शत प्रतिशत प्रसव सभी अस्पतालों में  सुनिश्चित हो। साथ ही टीकाकरण की वास्तविक स्थिति की फील्ड वेरिफिकेशन द्वारा पुष्टि की जाए।

उन्होंने कहा कि मैटरनल डेथ ऑडिट प्रत्येक मामले में अनिवार्य रूप से किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम की रणनीति बन सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि एनआरसी सेंटरों का संचालन नियमित और प्रभावी होना चाहिए तथा माताओं और बच्चों के पोषण पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने वेलनेस सेंटरों को सक्रिय कर गैर-संचारी रोगों  के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने बस्तर संभाग में मलेरिया उन्मूलन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि हॉटस्पॉट क्षेत्रों की पहचान कर विशेष अभियान चलाया जाए ताकि छत्तीसगढ़ को “मलेरिया-मुक्त राज्य” बनाने का लक्ष्य शीघ्र पूरा किया जा सके। उन्होंने प्रधानमंत्री वय वंदना योजना के अंतर्गत सभी पात्र वृद्धजनों के पंजीयन और कार्ड निर्माण कार्य को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए।

शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि ड्रॉपआउट शून्य करने और सकल नामांकन अनुपात को 100 प्रतिशत करने का लक्ष्य किसी भी हालत में पूरा होना चाहिए।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि शिक्षण सामग्री अलमारियों में नहीं, कक्षाओं में दिखनी चाहिए। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि शिक्षण संसाधनों का उपयोग कक्षा में सुनिश्चित करें और नियमित मॉनिटरिंग करें।

मुख्यमंत्री ने बीजापुर जिले की सराहना करते हुए कहा कि वहाँ स्थानीय युवाओं की मदद से गोंडी भाषा में शिक्षण से बच्चों की उपस्थिति बढ़ी है और ड्रॉपआउट घटा है। उन्होंने सभी जिलों को ऐसे नवाचार अपनाने की सलाह दी ताकि शिक्षा स्थानीय संस्कृति और भाषा से जुड़ सके।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि 31 दिसंबर तक सभी विद्यार्थियों की आधार-बेस्ड APAR ID बनाकर रजिस्ट्रेशन पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था डिजिटल पारदर्शिता और छात्र लाभ वितरण में निर्णायक भूमिका निभाएगी। इसी आधार पर छात्रों को गणवेश, किताबें और छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में “मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान” चलाया जाएगा। इसमें स्कूलों का सामाजिक अंकेक्षण कर ग्रेडिंग होगी। उन्होंने कहा कि जिलों में परीक्षा परिणाम सुधार की ठोस योजना बने। जो जिले बेहतर कर रहे हैं, उनके मॉडल अन्य जिलों में लागू किए जाएँ।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिन शिक्षकों का प्रदर्शन उत्कृष्ट है, उन्हें प्रोत्साहित किया जाए। साथ ही आधार आधारित उपस्थिति प्रणाली की सख्त मॉनिटरिंग की जाए और गड़बड़ी मिलने पर तुरंत कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि शाला विकास समितियों को फिर से सक्रिय किया जाए और शहरी क्षेत्रों में अनुपस्थित छात्रों के परिजनों से संपर्क कर उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि धरती आबा अभियान राज्य के आदिवासी अंचलों के सर्वांगीण विकास का प्रतीक है। सभी 17 विभागों को आपसी समन्वय से योजनाओं के 100 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि हॉस्टल, छात्रावास, पेयजल, आजीविका, पशुपालन, डेयरी, मछलीपालन और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में एकीकृत दृष्टिकोण से काम किया जाए ताकि आदिवासी गाँव आत्मनिर्भर बन सकें।

मुख्यमंत्री  साय ने  बधाई दी कि आदि कर्मयोगी अभियान में छत्तीसगढ़ देश में पहले स्थान पर रहा। बैठक में बताया गया  कि 128 विकासखंडों के 6650 गांवों में 1.33 लाख वालेंटियरों के माध्यम से जनजातीय हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह अभियान जनजातीय समुदायों में उत्तरदायी शासन और आत्मनिर्भरता की भावना को सशक्त कर रहा है।

पीएम जनमन योजना — मार्च 2026 तक सभी कार्य पूर्ण करने के निर्देश

मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिए कि सभी कलेक्टर्स पाँच विशेष पिछड़ी जनजातियों के ग्राम विकास कार्यों में तेजी लाएं। 11 विभागों को गुणवत्ता से समझौता किए बिना स्वीकृत कार्य शीघ्र पूरा करने के आदेश दिए गए।
राज्य की 2300 से अधिक बस्तियों में दो लाख से अधिक जनसंख्या को इस योजना से लाभ मिला है। मनेंद्रगढ़ और धमतरी के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने अन्य जिलों को उनके अनुकरण की सलाह दी।

मुख्यमंत्री ने नगरीय प्रशासन विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि सभी नगरीय निकायों में नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना 1.0 के सभी शेष मकानों का निर्माण 31 दिसंबर 2025 तक पूरा किया जाए। जो मकान तैयार हैं, उनका अधिपत्य अगले दो माह में हितग्राहियों को सौंपा जाए। उन्होंने कहा कि निर्माण एजेंसियों को सक्रिय करें और भुगतान व मॉनिटरिंग में सुधार लाएं। औसत प्रतिदिन पूर्णता में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम स्थान पर है। बैठक में बताया गया कि “मोर गांव मोर पानी अभियान” के तहत 1.5 लाख से अधिक आवासों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत किए गए कार्यों के भुगतान में विलंब पर नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि भुगतान समय-सीमा में नहीं हो रहा, जिससे अभियान की गति प्रभावित हो रही है। उन्होंने निर्देश दिए कि आगे से सभी भुगतान तय समय में किए जाएं, अन्यथा संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कलेक्टर्स को निर्देश दिए कि वे सुबह 7 बजे से पहले नगरीय वार्डों में जाकर निरीक्षण करें और नगर निगम, नगर पालिका के कार्यों की नियमित समीक्षा करें। उन्होंने कहा कि सफाई, अपशिष्ट प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं की गुणवत्ता में सुधार प्राथमिकता से हो। उन्होंने चेताया कि केवल कागज़ी रिपोर्ट स्वीकार नहीं की जाएगी — फील्ड विज़िट अनिवार्य हैं।

तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास — युवाओं के लिए नए अवसर, समयबद्ध प्रशिक्षण और रोजगार पर फोकस

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग की समीक्षा करते हुए युवाओं के लिए राज्य स्तरीय रोजगार मेला आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत वार्षिक कार्ययोजना के अनुसार प्रशिक्षण बैचों का संचालन सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कलेक्टर्स को निर्देशित किया कि वे कौशल विकास से संबंधित गतिविधियों और प्रशिक्षण कार्यों की समीक्षा समय-समय पर करें और लाइवलीहुड कॉलेजों के निर्माण के लिए भूमि का शीघ्र चिन्हांकन कराएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में उपलब्ध संसाधनों के आधार पर स्किल गैप एनालिसिस कर वार्षिक कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि स्थानीय उद्योगों की मांग के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षित युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए हर तिमाही लोन मेले आयोजित करने तथा रोजगार कार्यालयों के माध्यम से काउंसलिंग कर औद्योगिक जिलों से रिक्तियां प्राप्त कर विभाग को भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण केवल प्रमाणपत्र तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तविक रोजगार और आत्मनिर्भरता में परिणत हो — यही कौशल विकास का वास्तविक उद्देश्य है।

ई-सेवाएं एवं लोक सेवा गारंटी — नागरिकों को समय पर सुविधाएं, डिजिटल सेवा विस्तार पर जोर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ई-सेवाएं एवं लोक सेवा गारंटी से संबंधित कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि बच्चे के जन्म के तुरंत बाद ही आवश्यक प्रमाणपत्र प्राप्त हों, इसके लिए त्वरित व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि लोक सेवा गारंटी के अंतर्गत आने वाली सभी आवश्यक सेवाओं का समय-सीमा में निस्तारण अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। बैठक में बताया गया कि वर्तमान में ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना के तहत 86 सेवाएं ऑनलाइन संचालित की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने कलेक्टर्स को निर्देशित किया कि लंबित आवेदनों की नियमित समीक्षा करें और संबंधित विभागों से समन्वय कर अधिकाधिक सेवाओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाए, ताकि जनता को पारदर्शी, तेज़ और सुविधा-जनक सेवा वितरण सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान स्पष्ट चेतावनी दी कि धान खरीदी में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, रेत के अवैध उत्खनन या प्रशासनिक अनियमितता पर शासन की सख्त नजर रहेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘जीरो टॉलरेंस नीति’ पर पूरी दृढ़ता से अमल कर रही है, और इस नीति के अंतर्गत दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों या कर्मचारियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य एजेंसियों को भुगतान निर्धारित समय-सीमा के भीतर किया जाए, ताकि विकास कार्यों की गति में किसी प्रकार की बाधा न आए।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि  प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही तभी सुनिश्चित होगी जब अधिकारी स्वयं फील्ड में जाकर कार्यों की स्थिति का निरीक्षण करेंगे। उन्होंने सभी अधिकारियों को अपने अधीनस्थ कार्यालयों का आकस्मिक निरीक्षण करने और लापरवाही पाए जाने पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुशासन और कार्यालय में उपस्थिति पर नियंत्रण के लिए राज्य स्तर के साथ-साथ सभी जिला कार्यालयों में भी बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली शीघ्र प्रारंभ की जाए।

उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य की योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रत्येक कलेक्टर अपने जिले की रैंकिंग सुधारने का संकल्प लें। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि रैंकिंग केवल आंकड़ों का विषय नहीं, बल्कि जनता तक पहुँचने वाले वास्तविक परिणामों का प्रतिबिंब होनी चाहिए।

बैठक के समापन पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे जनप्रतिनिधियों का सम्मान करें, उनकी बातों को गंभीरता से सुनें और उनके सुझावों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक जिम्मेदारी केवल योजनाओं के क्रियान्वयन या कार्य निष्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संवेदनशीलता, संवाद और जवाबदेही का भी विषय है। एक संवेदनशील प्रशासन ही जनता का विश्वास अर्जित कर सकता है, और वही सुशासन की वास्तविक पहचान है।

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