बस्तर जिले में 25 वर्षों में स्वास्थ्य सुविधाओं का उल्लेखनीय विकास, स्वास्थ्य क्रांति से लाखों जीवन हुए सुरक्षित

स्व. बलीराम कश्यप स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय: बस्तर का स्वास्थ्य गढ़
वर्ष 2006 में स्थापित यह मेडिकल कॉलेज बस्तर की स्वास्थ्य क्रांति का प्रतीक है। शुरुआत में प्रतिवर्ष 50 सीटों पर प्रवेश के साथ शुरू हुए इस कॉलेज का भूमि पूजन तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा 9 अगस्त 2006 को किया गया। निर्माण कार्य 2010 में शुरू होकर फरवरी 2013 में पूरा हुआ, और 3 अक्टूबर 2013 को मुख्यमंत्री द्वारा इसका लोकार्पण किया गया। मार्च 2014 में जगदलपुर से डिमरापाल में स्थानांतरित होने के बाद, यह कॉलेज प्रदेश का एकमात्र वायरोलॉजी लैब संचालित कर रहा है, जो माइक्रोबायोलॉजी विभाग में स्थित है। भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद (एमसीआई) से मान्यता प्राप्त इस संस्थान में एमसीआई मानकों के अनुरूप सभी चिकित्सा उपकरण उपलब्ध हैं। अस्पताल का स्थानांतरण 6 जुलाई 2018 को नए भवन में हो चुका है, जिससे विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं और मजबूत हुई हैं। यह कॉलेज न केवल डॉक्टर तैयार कर रहा है, बल्कि महामारी जैसी चुनौतियों से निपटने में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

 बस्तर जिले में 25 वर्षों में स्वास्थ्य सुविधाओं का उल्लेखनीय विकास, स्वास्थ्य क्रांति से लाखों जीवन हुए सुरक्षित

सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल: बस्तर को मिला विश्व स्तरीय स्वास्थ्य केंद्र
संभाग मुख्यालय जगदलपुर में डिमरापाल स्थित सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल अब बनकर तैयार है और जल्द ही सेवाएं शुरू होने वाली हैं। यह अस्पताल जटिल रोगों के इलाज में क्रांति लाएगा, जहां हृदय, किडनी और न्यूरो जैसी स्पेशलिटी सेवाएं उपलब्ध होंगी। बस्तर जैसे सुदूर क्षेत्र में यह अस्पताल स्थानीय लोगों को बड़े शहरों की यात्रा से मुक्ति दिलाएगा, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी।

महारानी अस्पताल: 1937 से जारी सेवा का आधुनिकीकरण
1937 से बस्तर संभाग का सबसे बड़ा शासकीय अस्पताल महारानी अस्पताल आज भी स्वास्थ्य सेवाओं का मजबूत स्तंभ है। अगस्त 2006 से यह स्व. बलीराम कश्यप चिकित्सा महाविद्यालय सह अस्पताल के रूप में जाना जाता था, जहां 500 बिस्तर सक्रिय थे। 6 जुलाई 2018 से मेडिकल कॉलेज के अलग होने के बाद इसे पुनः महारानी अस्पताल के रूप में स्थापित किया गया। अस्पताल के जीर्णोद्धार के तीन चरणों में धन्वंतरी ओपीडी, सुश्रुत अस्थि रोग शल्य चिकित्सा कॉम्प्लेक्स, डिजिटल एक्स-रे, आईसीयू, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर जैसी सुविधाएं शुरू की गईं। दूसरे चरण में फिजियोथेरेपी, आयुष विभाग और ऑडिटोरियम जोड़े गए, जबकि तीसरे चरण में कादम्बिनी मातृ-शिशु स्वास्थ्य संस्थान ने गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए टीकाकरण, सोनोग्राफी, प्रसव पूर्व-पश्चात जांच, सामान्य-सिजेरियन डिलीवरी, परिवार नियोजन और सीटी स्कैन जैसी सेवाएं शुरू कीं। वर्तमान में 200 बिस्तरों वाला यह अस्पताल दैनिक 700-800 ओपीडी, 40-45 आईपीडी, 8 प्रसव, 2200-2500 पैथोलॉजी टेस्ट और 65 एक्स-रे संचालित कर रहा है। प्रमुख विभागों में हमर लैब पैथोलॉजी, सर्जरी, मेजर सर्जरी, स्त्री रोग/प्रसूति, नेत्र चिकित्सा, कैंसर, इमरजेंसी, रेडियोलॉजी, शिशु रोग, अस्थि रोग और डायलिसिस शामिल हैं। भविष्य में 12 बिस्तर शिशु आईसीयू, जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र और 30 बिस्तर डेडिकेटेड शिशु वार्ड शुरू होने वाले हैं।

महारानी अस्पताल की उत्कृष्टता को कई पुरस्कारों से नवाजा गया है- 2023 में सर्वश्रेष्ठ सिविल सर्जन पुरस्कार, एनक्यूएएस सर्टिफिकेशन से 17 विभागों को राष्ट्रीय प्रमाणन, 2022-23 में कायाकल्प पुरस्कार में राज्य स्तर पर प्रथम स्थान। 2023-24 में कायाकल्प पुरस्कार की कंसिस्टेंसी श्रेणी में सम्मान। अस्थि रोग विभाग में पहली बार हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी शुरू, जिसमें एक महिला का सफल ऑपरेशन।

ग्रामीण स्वास्थ्य का विस्तार: हर गांव तक पहुंच
पिछले 25 वर्षों में बस्तर जिले में 2 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 7 से 8 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 3 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बढ़े हैं, जिससे 20-30 हजार जनसंख्या पर एक केंद्र उपलब्ध हो गया है। साथ ही, 50 से 60 उप स्वास्थ्य केंद्रों की वृद्धि से 3-5 हजार जनसंख्या और 3-5 किमी दायरे में प्राथमिक सेवाएं पहुंच रही हैं। अधोसंरचना के साथ मानव संसाधन, लैब जांच, ओपीडी/आईपीडी सुविधाओं में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

ये उपलब्धियां छत्तीसगढ़ सरकार की दूरदर्शिता का प्रमाण हैं, जो बस्तर जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे रही हैं।राज्य सरकार की प्राथमिकता सूची में स्वास्थ्य क्षेत्र को शीर्ष स्थान देने के परिणामस्वरूप बस्तर में नए स्वास्थ्य केंद्र, आयुष्मान कार्ड, मातृ एवं शिशु देखभाल सेवाएं, एम्बुलेंस सुविधा और टेलीमेडिसिन सेवा जैसी पहलें सफलतापूर्वक लागू की गई हैं।कोविड-19 महामारी के दौरान बस्तर की स्वास्थ्य व्यवस्था ने मजबूती का परिचय दिया — ऑक्सीजन प्लांट, कोविड अस्पताल और टीकाकरण अभियान ने नए आयाम स्थापित किए।
वर्तमान में बस्तर जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और ब्लॉक स्तर के स्वास्थ्य संस्थान आधुनिक उपकरणों, लैब सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम से सुसज्जित हैं। आने वाले वर्षों में सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर के हर नागरिक को “गांव के पास ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधा” मिले।

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