नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय हुए शामिल

सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा

नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय हुए शामिल

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज जशपुर प्रवास के दौरान दुलदुला विकास खंड के ग्राम सिरीमकेला स्थित श्री नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के पावन प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में सम्मिलित हुए। उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर देवाधिदेव महादेव से समस्त छत्तीसगढ़वासियों के सुख, समृद्धि और कल्याण की मंगलकामना की। महाशिवरात्रि के पावन पर्व के एक दिन पूर्व आयोजित इस आध्यात्मिक आयोजन को उन्होंने श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बताया।

मुख्यमंत्री साय ने ग्राम सिरीमकेला में सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा करते हुए कहा कि इससे स्थानीय नागरिकों को सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पारिवारिक आयोजनों के लिए सुदृढ़ आधार मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कल हम सब महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाएंगे और इस अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि सिरीमकेला में भक्तों और अपने परिवारजनों के बीच आकर उन्हें आध्यात्मिक शांति और आनंद की अनुभूति हो रही है। भक्ति और श्रद्धा के इस अनूठे आयोजन में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सनातन परंपरा को पुनर्स्थापित करते हुए अयोध्या धाम दर्शन योजना एवं मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालुओं को धार्मिक यात्राएँ करा रही है। श्रवण कुमार के पदचिन्हों पर चलने का प्रयास करते हुए अब तक प्रदेश के 42 हजार से अधिक तीर्थ यात्रियों को श्रीरामलला के दर्शन कराए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अयोध्या धाम में श्री रामलला का भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है और हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर आज ध्वज लहरा रहा है। प्रत्येक राम भक्त की आस्था 500 वर्षों तक प्रज्वलित रही — यह एक ऐसा यज्ञ था जिसकी लौ कभी नहीं डगमगाई। हम सब निमित्त मात्र हैं, जो अपने भांचा राम के दर्शन उनके भव्य मंदिर में कर रहे हैं और श्रद्धालुओं को करा पा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज नीलकंठेश्वर महादेव का दर्शन पाकर वे स्वयं को अत्यंत सौभाग्यशाली महसूस कर रहे हैं। दशहरा पर्व के दिन नीलकंठ के दर्शन को अत्यंत शुभ माना जाता है और आज प्राण-प्रतिष्ठा के उपरांत यहाँ निरंतर दर्शन लाभ मिलना हम सबके लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि जशपुर में मधेश्वर महादेव स्थित हैं, जिसे लोक मान्यता के अनुसार एशिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग कहा जाता है। सनातन परंपरा में भक्ति का विशेष महत्व है और राज्य सरकार भक्तों का सम्मान करती है। सावन माह में भोरमदेव मंदिर में कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा कर हर वर्ष आस्था प्रकट की जाती है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहे जाने वाले राजिम त्रिवेणी संगम में इन दिनों राजिम कुंभ कल्प का भव्य आयोजन हो रहा है, जहाँ आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान कुलेश्वरनाथ महादेव के दर्शन अवश्य करें। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। राजिम कुंभ कल्प की प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित किया गया है, ऐतिहासिक बस्तर दशहरा की पहचान देश-विदेश तक है तथा छत्तीसगढ़ के पाँच शक्ति पीठों के विकास के लिए कार्य योजना बनाकर सतत कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता और प्रकृति संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि के इस पावन कालखंड में नीलकंठेश्वर महादेव की कृपा हम सभी पर बनी रहे, प्रदेश में सुख-शांति, समृद्धि और विकास की नई धाराएँ प्रवाहित हों तथा छत्तीसगढ़ आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक वैभव के साथ निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर रहे — यही उनकी हार्दिक कामना है।

इस अवसर पर सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय, महासमुंद विधायक  योगेश्वर राजू सिन्हा, पूर्व राज्यसभा सांसद  रणविजय सिंह जुदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष  यश प्रताप सिंह जुदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष  सुशीला साय,  कृष्णा राय,  पवन साय,  भरत सिंह,  अरविन्द प्रसाद साय,  कपिल देव साय, सरगुजा आईजी  दीपक कुमार झा, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह, वनमंडलाधिकारी श्री शशि कुमार तथा महादेव मंदिर समिति के सदस्यगण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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