मुख्य सचिव विकास शील की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई बस्तर में आजीविका विकास हेतु कार्यशाला

मुख्य फ़ोकस नक्सल मुक्त क्षेत्रों में स्थायी एवं समावेशी विकास

एलडब्ल्यूई प्रभावित 08 जिलों के परिवारों की आय 30 हजार रुपये प्रतिमाह तक बढ़ाने का लक्ष्य

मुख्य सचिव श्री विकास शील की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई बस्तर में आजीविका विकास हेतु कार्यशाला

मुख्य सचिव श्री विकास शील की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई बस्तर में आजीविका विकास हेतु कार्यशाला

राज्य में नक्सलवाद से मुक्त हुए क्षेत्रों में तीव्र, स्थायी एवं समावेशी विकास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आज मुख्य सचिव श्री विकास शील की अध्यक्षता में इन जिलों के आजीविका संवर्धन हेतु राज्यस्तरीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया।

मुख्य सचिव श्री विकास शील की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई बस्तर में आजीविका विकास हेतु कार्यशाला

कार्यशाला में अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती निहारिका बारीक, प्रमुख सचिव कृषि श्रीमती सहला निगार, प्रमुख सचिव श्री सोनमणि वोरा, सचिव श्री भीम सिंह सहित संबंधित जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, गृह एवं जेल विभाग, आदिम जाति कल्याण विभाग, ग्रामोद्योग विभाग तथा ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यशाला में ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री अनीश कुमार द्वारा इन क्षेत्रों के लिए तैयार समन्वित नीति पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई।

इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री विकास शील ने कहा कि जैसे-जैसे छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त होता जा रहा है, हमारी जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। जिन क्षेत्रों में अब तक विकास नहीं पहुंच सका, वहां पहुंचकर हमें सतत एवं समावेशी विकास सुनिश्चित करना होगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप सभी विभागों को समन्वित दृष्टिकोण के साथ आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना तैयार कर कार्य करना होगा।

स्थानीय संसाधनों के आधार पर आजीविकामूलक गतिविधियों के संचालन एवं संवर्धन पर विशेष जोर दिया जाए।
कार्यशाला में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत किए। जिला स्तर के अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। इस दौरान क्लस्टर आधारित एवं ब्लॉक केंद्रित आजीविका मॉडल पर विस्तार से चर्चा की गई। इस मॉडल के अंतर्गत कृषि, पशुपालन, वनोपज, मत्स्य पालन, हस्तशिल्प एवं सूक्ष्म उद्यमों को जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की योजना है। इसमें विभिन्न विभागों की योजनाओं का एकीकृत क्रियान्वयन एवं बेहतर कन्वर्जेंस सुनिश्चित किया जाएगा।

कार्यशाला में जिला, विकासखंड एवं क्लस्टर स्तर पर त्रिस्तरीय योजना निर्माण एवं क्रियान्वयन की रूपरेखा पर चर्चा की गई। स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं तैयार कर उन्हें तेजी से लागू किया जाएगा। राज्य सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आय में वास्तविक वृद्धि सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही युवाओं को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया गया।

कार्यशाला में यह भी बताया गया कि उत्पादन से लेकर विपणन तक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे उत्पादकों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि अगले चरण में प्रत्येक विकासखंड में संभावित आजीविका क्लस्टरों की पहचान कर 60 दिनों के भीतर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए, जिसमें सर्वेक्षण, योजना निर्माण एवं क्रियान्वयन की रूपरेखा शामिल होगी। कार्यशाला में प्रस्तुत रणनीति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का मजबूत आधार बनेगी। यह पहल ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

कार्यशाला में वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित जिलों में आजीविका परिवर्तन एवं जीवन स्तर में सुधार हेतु परिवारों की आय बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। एनसीएईआर (NCAER) के सर्वेक्षण के अनुसार इन क्षेत्रों के 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने अगले ढाई से तीन वर्षों में इसे बढ़ाकर न्यूनतम 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारीक ने इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु विविधीकरण, सामूहिकीकरण, प्रौद्योगिकी एवं संतृप्ति के चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित रणनीति पर प्रकाश डाला। इसके अंतर्गत प्रत्येक परिवार को कम से कम तीन आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जाएगा तथा प्रत्येक जिले में चार प्रमुख आजीविका क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

यह पहल क्लस्टर आधारित एवं बाजार उन्मुख दृष्टिकोण पर आधारित होगी, जिसमें सशक्त मूल्य श्रृंखला तंत्र विकसित किया जाएगा। मुख्य सचिव ने जिला प्रशासन को सक्रिय नेतृत्व सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। नाबार्ड, एफईएस तथा प्रदान जैसे सहयोगी संगठनों द्वारा एनटीएफपी (लघु वनोपज) मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने एवं एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) को बढ़ावा देने संबंधी सुझाव प्रस्तुत किए गए। कार्यशाला में “ट्राइपॉड मॉडल” को योजना निर्माण के आधार के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसमें परिवार, क्षेत्र एवं गतिविधियों का समेकित दृष्टिकोण शामिल है।

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