तेंदूपत्ते से समृद्धि, तीखुर से आत्मनिर्भरता : बड़ेकनेरा में वनाधारित आजीविका का सशक्त मॉडल बना प्रेरणा

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने हितग्राहियों से की आत्मीय मुलाकात, ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत किया पौधरोपण

वन आधारित अर्थव्यवस्था से शिक्षा, रोजगार, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा को मिली नई मजबूती

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने हितग्राहियों से की आत्मीय मुलाकात, ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत किया पौधरोपण

सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज कोंडागांव जिले के ग्राम बड़ेकनेरा में वन विभाग की योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों से आत्मीय संवाद कर वनाधारित आजीविका से आए सकारात्मक बदलावों को नजदीक से जाना। मुख्यमंत्री ने तेंदूपत्ता संग्राहकों, महिला स्व-सहायता समूहों, विद्यार्थियों और किसानों से मिलकर उनकी जीवन यात्रा, संघर्ष और योजनाओं से हुए परिवर्तन की कहानियों को सुना। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं चलाना नहीं, बल्कि गांवों में सम्मानजनक आजीविका, शिक्षा, आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार तैयार करना है।

मुख्यमंत्री  साय सबसे पहले तेंदूपत्ता संग्राहक श्रीमती वेदबती यादव के घर पहुंचे, जहां उन्होंने परिवारजनों से आत्मीय चर्चा की। श्रीमती यादव ने बताया कि उन्होंने इस वर्ष 3720 गड्डी तेंदूपत्ता संग्रहित कर 20 हजार 460 रुपये की आय अर्जित की है। उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता संग्रहण अब उनके परिवार के लिए आय का भरोसेमंद माध्यम बन गया है। मुख्यमंत्री ने उनके परिश्रम की सराहना करते हुए कहा कि वन संपदा पर आधारित आजीविका ग्रामीण परिवारों की आर्थिक मजबूती का सशक्त माध्यम बन रही है।

मुख्यमंत्री ने वन धन विकास केंद्र मर्दापाल से जुड़ी मां शीतला स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती विमला भोयर से भी चर्चा की। श्रीमती भोयर ने बताया कि उन्होंने इस सीजन में एक माह के भीतर 85 किलोग्राम तीखुर का प्रसंस्करण कर लगभग 85 हजार रुपये की आय अर्जित की है। उन्होंने बताया कि पहले वन उत्पाद सीमित उपयोग तक रह जाते थे, लेकिन प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन से अब आय के नए अवसर बने हैं। मुख्यमंत्री ने इसे महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और स्थानीय संसाधनों पर आधारित ग्रामीण उद्यमिता का प्रेरक उदाहरण बताया। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री का जामुन, आम और तीखुर से बने पारंपरिक शरबत से स्वागत किया।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने तेंदूपत्ता संग्राहक परिवार की बेटी राजबती मंडावी से भी संवाद किया। राजबती को कक्षा 12वीं में 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने पर तेंदूपत्ता हितग्राही छात्रवृत्ति योजना के तहत 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिली है। मुख्यमंत्री ने उसकी उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि वन आधारित योजनाएं केवल आजीविका तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने का भी माध्यम बन रही हैं। उन्होंने राजबती को आगे की पढ़ाई के लिए शुभकामनाएं देते हुए मेहनत और शिक्षा को सफलता का आधार बताया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने ग्राम के किसान श्री गौतम यादव द्वारा मक्के की खेती के साथ तालाब में किए जा रहे मत्स्य पालन का भी अवलोकन किया। श्री यादव ने बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, कृषि उन्नति योजना सहित विभिन्न योजनाओं का लाभ मिला है, जिससे खेती और मत्स्य पालन को एकीकृत कर आय में निरंतर वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती, वानिकी और मत्स्य पालन का समन्वित मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

बड़ेकनेरा प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने लोगों से अधिकाधिक वृक्षारोपण कर प्रकृति संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि पेड़ केवल पर्यावरण नहीं बचाते, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को जीवन, सुरक्षा और समृद्धि भी प्रदान करते हैं।

कार्यक्रम के दौरान वन विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत हितग्राहियों को लाभान्वित भी किया गया। मर्दापाल परिक्षेत्र में किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत दो किसानों को 5,500 नीलगिरी पौधे वितरित किए गए। तेंदूपत्ता हितग्राही छात्रवृत्ति योजना के तहत विद्यार्थियों को 25-25 हजार रुपये की छात्रवृत्ति तथा राजमोहिनी देवी तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना के अंतर्गत तीन हितग्राहियों को कुल 6 लाख 30 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई।

बड़ेडोंगर परिक्षेत्र में किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत किसानों को 2,500 नीलगिरी पौधे वितरित किए गए। एक तेंदूपत्ता संग्राहक को 20,460 रुपये का भुगतान किया गया तथा विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति राशि प्रदान की गई। वन प्रबंधन समिति कमेला को लाभांश के रूप में 8 लाख 46 हजार रुपये की राशि भी प्रदान की गई। नारंगी परिक्षेत्र में तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य के तहत एक हितग्राही को 21,873 रुपये 50 पैसे का भुगतान तथा विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देकर शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया गया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि वन विभाग की योजनाएं केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे ग्रामीण परिवारों की आजीविका, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और आत्मविश्वास को भी मजबूत कर रही हैं। तेंदूपत्ता संग्राहकों, महिलाओं, किसानों और विद्यार्थियों को योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है और वन आधारित अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर गांवों की दिशा में सशक्त आधार बन रही है।

इस अवसर पर बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं कोंडागांव विधायक सुश्री लता उसेंडी, केशकाल विधायक श्री नीलकंठ टेकाम, कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना सहित जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारी उपस्थित थे।

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