शाला त्यागी एवं अप्रवेशी बच्चों को स्कूल से जोड़ने पालकों से की भावुक अपील
कलेक्टर विश्वदीप ने जिले के अभिभावकों से अपने बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की अपील करते हुए कहा है कि शिक्षा ही बच्चों के सर्वांगीण विकास, बेहतर व्यक्तित्व निर्माण तथा परिवार, समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे का विद्यालय से जुड़ना न केवल उसका अधिकार है, बल्कि विकसित और सशक्त समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम भी है।
कलेक्टर श्री विश्वदीप ने बताया कि पूर्व में जिला माओवाद प्रभावित होने के कारण अनेक स्कूलों एवं आश्रम-छात्रावासों को सुरक्षा की दृष्टि से अन्य स्थानों पर संचालित किया जा रहा था। अब जिले में सामान्य स्थिति स्थापित होने और क्षेत्र के नक्सलमुक्त होने के बाद विद्यालयों एवं आश्रमों को पुनः उनके मूल स्थानों पर संचालित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिससे बच्चों को अपने गांव और आसपास ही शिक्षा की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
उन्होंने कहा कि जिले में विभिन्न कारणों से चार हजार तीन सौ बच्चे अभी भी शिक्षा से वंचित हैं, जिनमें शाला त्यागी एवं अप्रवेशी बच्चे शामिल हैं। ऐसे बच्चों को पुनः विद्यालयों से जोड़ने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है। विभागीय अधिकारी, कर्मचारी एवं शिक्षक घर-घर पहुंचकर पालकों से संपर्क कर रहे हैं तथा बच्चों का विद्यालयों में प्रवेश सुनिश्चित करने के प्रयास कर रहे हैं।
कलेक्टर ने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों के बेहतर भविष्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें नियमित रूप से विद्यालय भेजें तथा शिक्षा के महत्व को समझें। उन्होंने कहा कि शिक्षित बच्चे ही आगे चलकर समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए प्रत्येक परिवार का दायित्व है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
उन्होंने जिलेवासियों से शिक्षा विभाग के इस अभियान में सहयोग करने तथा शाला त्यागी एवं अप्रवेशी बच्चों को पुनः विद्यालयों से जोड़ने में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। कलेक्टर ने विश्वास व्यक्त किया कि जनसहयोग और सामूहिक प्रयासों से जिले का प्रत्येक बच्चा शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ सकेगा और अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर पाएगा।