विश्व जनसंख्या दिवस पर जनसंख्या स्थिरता पखवाड़े का शुभारंभ, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री ने जागरूकता रथ को दिखाई हरी झंडी

11 से 18 जुलाई तक जिलेभर में परिवार नियोजन और मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर चलेंगे व्यापक जनजागरूकता अभियान

विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर सरगुजा जिले में जनसंख्या स्थिरता पखवाड़े का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल ने जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रमण कर नागरिकों को परिवार नियोजन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, छोटे परिवार के महत्व तथा जनसंख्या स्थिरता से जुड़े महत्वपूर्ण संदेशों से जागरूक करेगा।

इस अवसर पर संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि स्वस्थ परिवार ही समृद्ध समाज और विकसित राष्ट्र की सबसे मजबूत आधारशिला है। जनसंख्या स्थिरता केवल जनसंख्या नियंत्रण का विषय नहीं, बल्कि माताओं और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, परिवार की आर्थिक उन्नति, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा समाज के संतुलित विकास से जुड़ा एक व्यापक सामाजिक अभियान है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक परिवार यदि जिम्मेदारीपूर्वक परिवार नियोजन को अपनाए और बच्चों के जन्म के बीच उचित अंतर रखे, तो आने वाली पीढ़ी अधिक स्वस्थ, शिक्षित और सक्षम बन सकेगी।

अग्रवाल ने कहा कि राज्य शासन स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। परिवार नियोजन से संबंधित सभी आवश्यक सेवाएं और साधन स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की भ्रांतियों या अफवाहों पर विश्वास न करें और स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही वैज्ञानिक एवं सुरक्षित सेवाओं का लाभ उठाएं।
उन्होंने कहा कि छोटा, स्वस्थ और शिक्षित परिवार ही आत्मनिर्भर समाज का आधार है। जनसंख्या स्थिरता के माध्यम से मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर तथा कुपोषण जैसी चुनौतियों में प्रभावी कमी लाई जा सकती है। यह अभियान केवल स्वास्थ्य विभाग का नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की सहभागिता से सफल होने वाला जनआंदोलन है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, शिक्षकों, युवाओं एवं मीडिया से इस जनहितकारी अभियान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का आह्वान किया।

जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा 11 जुलाई से 18 जुलाई 2026 तक जिलेभर में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा परिवार कल्याण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, परिवार नियोजन के आधुनिक साधनों की उपलब्धता, छोटे परिवार के लाभ तथा जनसंख्या स्थिरता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। स्वास्थ्य संस्थानों, ग्राम पंचायतों तथा नगरीय क्षेत्रों में जनजागरूकता अभियान, परामर्श शिविर, प्रचार-प्रसार गतिविधियां एवं समुदाय आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को परिवार नियोजन का संदेश दिया जाएगा।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पी.एस. मार्को ने बताया कि बच्चों के जन्म के बीच पर्याप्त अंतर रखने से माता एवं शिशु दोनों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है। इससे मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर तथा कुपोषण जैसी समस्याओं में कमी आती है। साथ ही माता-पिता अपने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं उज्ज्वल भविष्य पर बेहतर ढंग से ध्यान दे पाते हैं, जिससे परिवार का जीवन स्तर भी ऊंचा होता है।

उन्होंने कहा कि परिवार नियोजन केवल जनसंख्या नियंत्रण का उपाय नहीं, बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की सुरक्षा, परिवार की आर्थिक मजबूती तथा सतत विकास का महत्वपूर्ण माध्यम है। पखवाड़े के दौरान जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में इच्छुक दंपत्तियों को परिवार नियोजन संबंधी निःशुल्क परामर्श एवं सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। कॉपर-टी, गर्भनिरोधक गोलियां, कंडोम सहित अन्य परिवार नियोजन साधन निःशुल्क वितरित किए जाएंगे तथा आवश्यकतानुसार स्थायी एवं अस्थायी परिवार नियोजन सेवाएं भी उपलब्ध रहेंगी।

अभियान के दौरान सही उम्र में विवाह, पहले बच्चे के जन्म में उचित अंतराल तथा दो बच्चों के बीच पर्याप्त समय रखने जैसे विषयों पर विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। मैदानी स्वास्थ्य अमले द्वारा चिन्हांकित हितग्राहियों को घर-घर जाकर परामर्श, प्रचार सामग्री एवं गर्भनिरोधक साधनों का वितरण किया जाएगा। साथ ही पुरुष नसबंदी एवं महिला बंध्याकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे तथा सभी स्वास्थ्य संस्थानों को निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप सेवाएं प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में मितानिनों एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से सास-बहू सम्मेलन आयोजित कर महिलाओं एवं परिवारों को परिवार नियोजन, मातृ स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जानकारी दी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे जिम्मेदार अभिभावकत्व को अपनाते हुए उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं का अधिकतम लाभ लें तथा स्वस्थ, सशक्त और समृद्ध समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं।

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