पंचायत संसाधन केन्द्र में हुई महुआ लड्डू निर्माण कार्यशाला

पूरे बस्तर की आदिम संस्कृति में महुआ का विशिष्ट स्थान है। समुदाय के जन्म से लेकर विवाह, मृत्यु आदि संस्कारो में महुआ वृक्ष की उल्लेखनीय भूमिका रहती है। अगर इसे बस्तर के कल्प वृक्ष की संज्ञा दी जाये तो यह आतिशयोक्ति नहीं होगी, पर महुआ के स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी गुणो से बहुत ही कम व्यक्ति परिचित है। यह दिलचस्प तथ्य है कि महुआ का नाम आते ही देशी शराब की छवि उभर आती है। मुख्य रुप से देशी मदिरा निर्माण के रुप में आने वाले इन महुआ फलो में स्वास्थ्य की दृष्टि से पौष्टिक तत्वो की प्रचुरता रहती है जो बढ़ते हुए बच्चो और धात्री माताओं के लिए जरुरी है। महुआ के इन्हीं स्वास्थ्यवर्धक गुणो को फोकस करते हुए जिला प्रशासन इनसे पौष्टिक खाद्य सामग्री का निर्माण कर इन्हें पंचायतो एवं आंगनबाड़ी केन्द्रो के माध्यम से वितरित कराने की तैयारी में है।

 

महुआ‘ बनेगा अब कुपोषण से लड़ने का प्रमुख हथियार

जिले में कुपोषण एक गंभीर समस्या है अंतिम आंकड़ो के अनुसार कोण्डागांव में शून्य से 6 वर्ष के कुल 53 हजार 295 बच्चों में से 5 हजार 966 बच्चें गंभीर कुपोषित तथा 13 हजार 606 बच्चे मध्यम कुपोषित है उक्त आंकड़ो के आधार पर जिले में कुपोषण का प्रतिशत 36.72 है। ऐसे में महुआ से बने खाद्य सामग्री को अन्य पोषण आहार के साथ देने पर इस प्रतिशत को तेजी से घटाया जा सकता है। महुआ फलो पर किए गए शोध के आधार पर यह धात्री माताओं के लिए फायदेमंद साबित हुआ है। इसके अलावा महिलाओं में होने वाले अनियमित महावारी में भी यह लाभप्रद है, विटामिन ए, विटामिन सी की अधिकता के कारण यह आंखो की रौशनी एवं त्वचा रोग में भी असरकारी है। उक्त फल में आयरन की प्रचुरता होने के कारण यह शरीर में खून की मात्रा को बढ़ाने के साथ-साथ शरीर को ऊर्जा, मानसिक तनाव, हृदय की बीमारी, भूख बढ़ाने तथा शरीर में अतिरिक्त वसा को भी कम करता है। चूंकि इसके फलो में प्रोटीन 5.8 ग्राम, वसा 16.97 ग्राम, कार्बोहाइड्रेट 66.76 ग्राम होती है। साथ ही इसमें अन्य विटामिन जैसे कैरोटिन, थायमिन (बी-1), विटामिन सी, राइबोफेमिन (बी-2) एवं अन्य तत्व मैग्नीशियम, जिंक, कापर इत्यादि भी है जो बढ़ते हुए बच्चों के लिए आवश्यक होते है। इस प्रकार कुल मिलाकर यह फल एनीमिक महिलाओं एवं कुपोषित बच्चों के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध है।

 

लड्डू निर्माण से महिलाओं को मिलेगा एक नया रोजगार

इस क्रम में मुख्यालय स्थित जिला पंचायत संसाधन केन्द्र में पांच दिवसीय (09 दिसम्बर से 13 दिसम्बर 2019) तक महुआ लड्डू कार्यशाला का आयोजन किया गया था। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान‘ के तत्वाधान में आयोजित इस कार्यशाला में जिले के सभी पांच ब्लॉक के स्व-सहायता समूह से चयनित 55 महिलाओं को महुआ लड्डू बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। इस कार्यशाला में महिलाओं को न केवल महुआ लड्डू बनाने के लिए प्रशिक्षित किया गया बल्कि उसके व्यवसायिक रुप से उत्पादन जैसे मार्केटिंग के तरीके भी समझाये गए। इसके लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान‘ के द्वारा उन्हें अनुदान भी उपलब्ध कराया जायेगा। इस मौके पर कलेक्टर श्री नीलकंठ टीकाम ने महिलाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि महुआ से लड्डू निर्माण को स्वरोजगार के नए साधन के रुप में उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि समूह की महिलाऐं इसका व्यापक स्तर पर उत्पादन कर अपनी आमदनी का नया जरिया ढूंढ सकेंगी। चूंकि महुआ के स्वास्थ्यवर्धक गुणो से अब सभी परिचित है, अतः इसे मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत पौष्टिक आहार के रुप में भी जोड़ा जायेगा। जिले में कुपोषण की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि हमारे वनीय विरासत में कई ऐसे पौष्टिक तत्व मौजूद है, जिनसे हम आसानी से कुपोषण से लड़ सकते है इसके लिए आयातित महंगे प्रोटीन पाउडर, दवाईयाँ तथा फल इत्यादि की भी आवश्यकता नहीं है, अतः जनजागरुकता हो तो ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों से भी कुपोषण पर काबू पाया जा सकता है। मौके पर ग्राम बोलबोला निवासी प्रशिक्षार्थी अनिता कोर्राम ने बताया कि महुआ से लड्डू बनाने का यह अनुभव पहली बार हुआ है साथ ही वे सभी महुआ के स्वास्थ्यवर्धक गुणो से परिचित भी हुई है अब वे समूह के माध्यम से इसको बनाने का अभ्यास करेंगीं। इस दौरान सीईओ जिला पंचायत डी.एन.कश्यप, मास्टर ट्रेनर सुश्री शेख रजिया, एपीओ जिला पंचायत सी.एस.ध्रुव, आर.एल.बंजारे सहित प्रशिक्षु महिलाऐं उपस्थित थी।

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